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बिना कारण पति छोड़ने वाली को भरण-पोषण नहीं कोर्ट का फैसला,

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बिना कारण पति को छोड़कर अलग रहने वाली पत्नी भरण-पोषण पाने की अधिकारी नहीं है। इसी टिप्पणी के साथ द्वितीय अपर प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश रवींद्र कुमार ने गुजारा-भत्ता पाने के लिए दाखिल महिला की याचिका को खारिज कर दिया। युवती मारपीट और प्रताड़ना को साबित नहीं कर सकी। 

नौघड़ा की ज्योति गुप्ता और विकास नगर के आशीष गुप्ता की शादी पांच जून 2016 को हुई थी। ज्योति का कहना था कि ससुरालीजनों के उत्पीड़न और मारपीट से परेशान होकर शादी के एक माह बाद ही वह मायके चली गई। तब से मायके में ही रह रही है। गुजर-बसर का कोई साधन न होने की बात कहते हुए उसने आशीष से गुजारा-भत्ता पाने के लिए पारिवारिक न्यायालय में मुकदमा दाखिल किया था। 

पति-पत्नी दोनों ने एक-दूसरे पर पहले से शादीशुदा होने का आरोप लगाया। दोनों कोर्ट में अपनी बात साबित नहीं कर सके। ज्योति का कहना था कि ससुराल वाले प्रताड़ित करते थे। सास ठीक से बोलती नहीं थी। बनाया हुआ खाना नहीं खाती थी। जिस कमरे में जेठ होते थे, वहां पर बैठने को कहती थी। ससुराल वाले उसे मारते-पीटते और प्रताड़ित करते थे। 

ज्योति कोर्ट के सामने कोई भी आरोप साबित नहीं कर सकी। इसी आधार पर कोर्ट ने माना कि ज्योति बिना किसी ठोस कारण पति को छोड़कर मायके में रह रही है। इसलिए वह गुजारा पाने की अधिकारी नहीं है। 

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