Himachal – Himachal Live https://himachal.live Letest Updates of Himachal Tue, 12 Nov 2024 17:15:38 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.7.1 https://himachal.live/wp-content/uploads/2024/10/logo-3-150x150.png Himachal – Himachal Live https://himachal.live 32 32 जिभी: हिमाचल का मिनी थाईलैंड https://himachal.live/jibhi-is-often-referred-to-as-mini-thailan/ Tue, 12 Nov 2024 14:54:05 +0000 https://himachal.live/?p=347 जिभी: हिमाचल का मिनी थाईलैंड हिमाचल प्रदेश की वादियों में बसा एक छोटा सा गाँव है जिभी, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण, और मनमोहक दृश्यावलियों के कारण “मिनी थाईलैंड” के नाम से मशहूर है। यह गाँव बंजार घाटी में स्थित है और यहाँ का वातावरण किसी स्वर्ग से कम नहीं है। जो भी पर्यटक […]]]>

जिभी: हिमाचल का मिनी थाईलैंड

हिमाचल प्रदेश की वादियों में बसा एक छोटा सा गाँव है जिभी, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता, शांत वातावरण, और मनमोहक दृश्यावलियों के कारण “मिनी थाईलैंड” के नाम से मशहूर है। यह गाँव बंजार घाटी में स्थित है और यहाँ का वातावरण किसी स्वर्ग से कम नहीं है। जो भी पर्यटक यहाँ आते हैं, वे इसकी अद्वितीय सुंदरता और प्राकृतिक सौंदर्य में खो जाते हैं।

जिभी की खासियतें

  1. प्राकृतिक सुंदरता:
    जिभी का आकर्षण यहाँ की हरी-भरी घाटियाँ, ऊँचे पहाड़, और कल-कल बहती नदियों में है। यह जगह किसी चित्रकार की कल्पना जैसी प्रतीत होती है। यहाँ का वातावरण इतना स्वच्छ और शुद्ध है कि पर्यटक इसे मानसिक शांति के लिए एक आदर्श स्थान मानते हैं।
  2. थाईलैंड जैसी जगहें:
    जिभी का उपनाम “मिनी थाईलैंड” इसलिए पड़ा है क्योंकि यहाँ के दृश्यों और वातावरण में थाईलैंड के पर्यटक स्थलों की झलक मिलती है। गाँव के आसपास के झरने, बांस के पेड़ और नदी के किनारे बसे सुंदर घर इस स्थान को थाईलैंड से मिलता-जुलता बनाते हैं।
  3. जलप्रपात और झीलें:
    जिभी के आसपास कई आकर्षक जलप्रपात और झीलें हैं, जैसे कि जिभी वाटरफॉल और चेहनी कोठी। यहाँ के जलप्रपातों का पानी इतना साफ और ठंडा होता है कि यहाँ नहाने का अनुभव रोमांचक होता है। पर्यटक यहाँ पिकनिक मनाने और स्विमिंग का आनंद लेने आते हैं।
  4. ट्रेकिंग और एडवेंचर स्पोर्ट्स:
    अगर आप ट्रेकिंग के शौकीन हैं, तो जिभी आपके लिए सही जगह है। यहाँ कई छोटे-बड़े ट्रेक हैं जो रोमांचकारी हैं और आपको प्रकृति के करीब ले जाते हैं। आप सेराज घाटी और ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क के ट्रेक भी कर सकते हैं, जो कि जिभी के पास ही स्थित हैं।
  5. स्थानीय संस्कृति और खानपान:
    जिभी में रहने वाले लोग बेहद मिलनसार और मेहमाननवाज हैं। यहाँ की पारंपरिक संस्कृति और यहाँ का खानपान पर्यटकों के लिए एक अलग अनुभव है। यहाँ की पहाड़ी थाली में खाने का अनुभव जरूर लें, जिसमें मुख्यतः सिद्दू, चटनी, राजमा, और पारंपरिक हिमाचली व्यंजन होते हैं।

कैसे पहुँचे जिभी

जिभी पहुँचने के लिए आप सड़क मार्ग, रेल या हवाई मार्ग का सहारा ले सकते हैं। निकटतम हवाई अड्डा भुंतर एयरपोर्ट है, जो जिभी से करीब 60 किमी दूर है। यहाँ से आप टैक्सी लेकर आसानी से जिभी पहुँच सकते हैं। निकटतम रेलवे स्टेशन जोगिंदर नगर है, जहाँ से जिभी के लिए टैक्सी उपलब्ध हैं।

अगर आप सड़क मार्ग से यात्रा करना पसंद करते हैं, तो दिल्ली, चंडीगढ़ और मनाली से नियमित बस सेवाएँ उपलब्ध हैं जो बंजार तक जाती हैं, और यहाँ से आप जिभी आसानी से पहुँच सकते हैं।

कब जाएँ जिभी

जिभी घूमने के लिए सबसे अच्छा समय मार्च से जून और अक्टूबर से नवंबर के बीच है। इस समय मौसम सुहावना होता है और पर्यटक यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य का भरपूर आनंद ले सकते हैं।


जिभी का शांत वातावरण, सुंदर दृश्य और प्रकृति की गोद में बसा यह गाँव हर यात्री के दिल में एक अलग ही छाप छोड़ जाता है। अगर आप हिमाचल प्रदेश की यात्रा पर हैं, तो इस मिनी थाईलैंड को अपनी यात्रा का हिस्सा अवश्य बनाएं और इस अनोखे गाँव की खूबसूरती का आनंद उठाएँ।

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मनाली के आसपास के 10 अद्भुत और अनदेखे स्थान, जो पर्यटक जरूर देखें https://himachal.live/10-amazing-and-hidden-places-around-manali-that-every-tourist-must-visit/ Mon, 11 Nov 2024 12:36:54 +0000 https://himachal.live/?p=333 Manali is often considered the "Heaven of India," attracting countless tourists each year. While most visitors flock to popular spots like Rohtang Pass, Solang Valley, and Mall Road, there are many hidden gems around Manali that offer unique experiences away from the crowds. Here are ten lesser-known but absolutely beautiful places around Manali that you should explore on your next trip.]]>

मनाली के आसपास के 10 अद्भुत और अनदेखे स्थान, जो पर्यटक जरूर देखें

मनाली को भारत का स्वर्ग कहा जाता है, जहाँ हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। लेकिन अधिकांश पर्यटक सिर्फ मुख्य जगहों जैसे रोहतांग पास, सोलांग वैली और मॉल रोड का ही आनंद लेते हैं। इस लेख में हम आपको मनाली के आसपास के कुछ अद्भुत और अनदेखे स्थानों के बारे में बताएंगे, जो आपकी यात्रा को और भी खास बना देंगे।


1. सेथन गाँव

  • स्थान और पहुँच: मनाली से लगभग 12 किलोमीटर दूर स्थित सेथन गाँव एक छोटा सा और शांत पहाड़ी गाँव है। यहाँ तक पहुँचने के लिए मनाली से टैक्सी या स्थानीय परिवहन का उपयोग किया जा सकता है।
  • विशेषताएं: यह जगह खासकर हिमाचल के बौद्ध समुदाय का घर है। यहाँ का वातावरण बहुत ही शांत और सुकूनभरा है।
  • मुख्य गतिविधियाँ: सेथन में आप स्नोबोर्डिंग, स्नो शूइंग, और ट्रेकिंग का आनंद ले सकते हैं। सर्दियों में यह जगह बर्फ से ढकी रहती है, जो इसे एक आकर्षक विंटर डेस्टिनेशन बनाता है।

2. हम्पटा पास

  • स्थान और पहुँच: हम्पटा पास ट्रेक मनाली से शुरू होता है और यह कूलु तथा स्पीति घाटी को जोड़ता है।
  • विशेषताएं: यह ट्रेक अपने बदलते हुए दृश्य और अद्वितीय परिदृश्य के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ बर्फीली पहाड़ियाँ, हरे-भरे घास के मैदान और ऊँची-नीची घाटियाँ देखने को मिलती हैं।
  • मुख्य गतिविधियाँ: हम्पटा पास ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए एक उत्कृष्ट जगह है। यहाँ का ट्रेकिंग अनुभव मनाली के अन्य ट्रेक्स की तुलना में अलग और रोमांचकारी है।

3. बृगु झील

  • स्थान और पहुँच: यह झील मनाली से लगभग 19 किलोमीटर दूर है और 4-5 घंटे के ट्रेक के बाद यहाँ पहुँचा जा सकता है।
  • विशेषताएं: 14,000 फीट की ऊँचाई पर स्थित बृगु झील एक शांत और पवित्र स्थान है। इसे महर्षि बृगु का स्थान माना जाता है और इसका धार्मिक महत्व भी है।
  • मुख्य गतिविधियाँ: यहाँ का ट्रेक मध्यम कठिनाई का होता है, जो अनुभवी और शुरुआती दोनों ट्रेकर्स के लिए उपयुक्त है। झील के पास पहुँचते ही हिमालय की ऊँचाई और सुंदरता का नजारा मन मोह लेता है।

4. गुलाबा

  • स्थान और पहुँच: गुलाबा, मनाली से करीब 20 किलोमीटर दूर है और यह रोहतांग पास के रास्ते में आता है।
  • विशेषताएं: रोहतांग पास के बंद होने पर गुलाबा ही स्नो स्पोर्ट्स के लिए विकल्प बनता है। यह स्थान बर्फ के साथ खिलवाड़ करने के लिए बहुत ही आकर्षक है।
  • मुख्य गतिविधियाँ: यहाँ आप स्नोमैन बनाना, बर्फ में खेलने के साथ-साथ स्नो स्कूटर और स्कीइंग का आनंद ले सकते हैं।

5. जाना वाटरफॉल

  • स्थान और पहुँच: यह झरना नग्गर गाँव के पास स्थित है और मनाली से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर है।
  • विशेषताएं: यह झरना बहुत ही शांति और सौंदर्य से परिपूर्ण है। इस स्थान की सुंदरता को अभी भी व्यावसायिक पर्यटन ने प्रभावित नहीं किया है।
  • मुख्य गतिविधियाँ: यहाँ पर आप ट्रेकिंग कर सकते हैं, प्राकृतिक सुंदरता का आनंद ले सकते हैं और स्थानीय व्यंजनों का स्वाद भी चख सकते हैं।

6. तोष गाँव

  • स्थान और पहुँच: मनाली से लगभग 3-4 घंटे की दूरी पर स्थित तोष गाँव, पार्वती घाटी के अंत में बसा हुआ है।
  • विशेषताएं: यह गाँव अपनी हिप्पी संस्कृति और अद्भुत प्राकृतिक दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की सादगी और शांति आपको मंत्रमुग्ध कर देगी।
  • मुख्य गतिविधियाँ: यहाँ पर आप ट्रेकिंग और कैम्पिंग का आनंद ले सकते हैं। तोष नदी के किनारे बैठकर यहाँ के वातावरण का आनंद लेना एक अलग ही अनुभव देता है।

7. सोयल गाँव

  • स्थान और पहुँच: यह गाँव मनाली से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर है।
  • विशेषताएं: सोयल गाँव अपनी ऐतिहासिक संस्कृति और पारंपरिक हिमाचली घरों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की शांति और प्राकृतिक सुंदरता सैलानियों को आकर्षित करती है।
  • मुख्य गतिविधियाँ: यहाँ पर आप वॉकिंग ट्रेल्स का आनंद ले सकते हैं, स्थानीय लोगों के साथ बातचीत कर सकते हैं और हिमाचली संस्कृति को करीब से समझ सकते हैं।

8. पतालसु झील

  • स्थान और पहुँच: यह झील सोलांग घाटी के पास है और यहाँ तक पहुँचने के लिए लगभग 3-4 घंटे का ट्रेक करना होता है।
  • विशेषताएं: पतालसु झील की खूबसूरती और वहाँ का शांत वातावरण आपके मन को शांत कर देगा।
  • मुख्य गतिविधियाँ: पतालसु झील ट्रेकर्स के लिए एक शानदार जगह है। यहाँ पर कैंपिंग भी की जा सकती है, जहाँ रात में तारों की छाँव में झील का सौंदर्य और भी निखर जाता है।

9. खीरगंगा ट्रेक

  • स्थान और पहुँच: खीरगंगा ट्रेक मनाली से 4-5 घंटे की दूरी पर पार्वती घाटी में स्थित है।
  • विशेषताएं: खीरगंगा अपनी गर्म पानी के कुंड और सुंदर ट्रेकिंग पथ के लिए प्रसिद्ध है।
  • मुख्य गतिविधियाँ: खीरगंगा ट्रेकिंग और हॉट स्प्रिंग्स के अनुभव के लिए सबसे बेहतरीन जगह है। यहाँ का वातावरण और दृश्य आपके मन को प्रसन्न कर देंगे।

10. मलाणा गाँव

  • स्थान और पहुँच: मनाली से लगभग 21 किलोमीटर दूर पार्वती घाटी में स्थित मलाणा गाँव, एक अनोखा गाँव है।
  • विशेषताएं: मलाणा अपनी अनोखी संस्कृति और ‘मलाणा क्रीम’ (हशीश) के लिए प्रसिद्ध है। इस गाँव के लोग अपने आप को सिकंदर महान के वंशज मानते हैं और उनकी संस्कृति बहुत ही अलग और अद्वितीय है।
  • मुख्य गतिविधियाँ: यहाँ की संस्कृति को करीब से देखना एक रोचक अनुभव है। मलाणा का प्राकृतिक सौंदर्य और वहाँ के लोगों की अनोखी जीवनशैली पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

इन अद्भुत और अनदेखे स्थानों की यात्रा से आपकी मनाली की यात्रा का अनुभव और भी यादगार हो जाएगा। हिमाचल प्रदेश की इन छुपी हुई जगहों की सुंदरता और शांति आपको एक अलग ही दुनिया में ले जाएगी।

 

10 Amazing and Hidden Places Around Manali That Every Tourist Must Visit

Manali is often considered the “Heaven of India,” attracting countless tourists each year. While most visitors flock to popular spots like Rohtang Pass, Solang Valley, and Mall Road, there are many hidden gems around Manali that offer unique experiences away from the crowds. Here are ten lesser-known but absolutely beautiful places around Manali that you should explore on your next trip.


1. Sethan Village

  • Location and Access: Located around 12 km from Manali, Sethan Village is a quiet and peaceful Himalayan village that can be reached via local transport or taxi.
  • Highlights: Sethan is home to a small Buddhist community, adding a unique cultural flavor to the area. The place offers serene landscapes and a tranquil atmosphere.
  • Activities: Winter brings opportunities for snowboarding, snowshoeing, and trekking. Covered in snow, this place transforms into a magical winter destination perfect for adventure enthusiasts.

2. Hampta Pass

  • Location and Access: The Hampta Pass trek starts from Manali and connects the lush green Kullu Valley with the arid Spiti Valley.
  • Highlights: Known for its constantly changing landscapes, Hampta Pass features snow-covered peaks, lush meadows, and rugged valleys.
  • Activities: Hampta Pass is a fantastic spot for trekking enthusiasts. The moderate-level trek offers an adventure filled with stunning views and a unique cross-over experience into Spiti.

3. Bhrigu Lake

  • Location and Access: Located about 19 km from Manali, Bhrigu Lake is a high-altitude glacial lake that requires a 4-5 hour trek.
  • Highlights: Situated at an altitude of 14,000 feet, this sacred lake is associated with the sage Bhrigu and holds significant religious value for locals.
  • Activities: The moderate trek to Bhrigu Lake is perfect for beginners and experienced trekkers alike. Upon arrival, you’re greeted by breathtaking views of the surrounding snow-capped peaks and the crystal-clear lake.

4. Gulaba

  • Location and Access: Located around 20 km from Manali, Gulaba lies on the way to Rohtang Pass.
  • Highlights: When Rohtang Pass is closed, Gulaba serves as an alternative for snow activities, providing a beautiful snow-filled experience.
  • Activities: Tourists can enjoy snow sports here, including skiing and snowboarding. This spot is especially popular for creating snowmen and enjoying the winter wonderland atmosphere.

5. Jana Waterfall

  • Location and Access: Situated near Naggar Village, about 30 km from Manali, Jana Waterfall is a hidden gem that offers a peaceful retreat.
  • Highlights: This scenic waterfall is a true natural paradise. With fewer tourists, it maintains a pristine environment and serene charm.
  • Activities: The waterfall can be reached by a short trek and is perfect for those who enjoy hiking, photography, and sampling local Himachali dishes served at nearby eateries.

6. Tosh Village

  • Location and Access: About 3-4 hours from Manali, Tosh Village is located at the end of the Parvati Valley.
  • Highlights: Known for its hippie culture and spectacular views, Tosh offers a unique cultural vibe combined with breathtaking Himalayan scenery.
  • Activities: Ideal for trekking and camping, visitors can relax by the Parvati River and take in the untouched natural beauty.

7. Soil Village

  • Location and Access: Around 8 km from Manali, Soil Village is a hidden Himalayan treasure.
  • Highlights: The village is renowned for its traditional Himachali houses and tranquil atmosphere, offering a glimpse into Himachali culture.
  • Activities: Take peaceful walking trails, interact with local villagers, and learn about traditional Himalayan culture. It’s a place where you can disconnect and enjoy nature.

8. Patalsu Lake

  • Location and Access: Situated near Solang Valley, Patalsu Lake can be reached via a 3-4 hour trek.
  • Highlights: The lake is incredibly scenic, offering a calm environment and stunning views of the surrounding mountains.
  • Activities: Ideal for trekking and camping, Patalsu Lake is a hidden gem for those who enjoy stargazing and peaceful natural retreats.

9. Kheerganga Trek

  • Location and Access: Located in Parvati Valley, about 4-5 hours from Manali, Kheerganga Trek is a famous destination for trekkers.
  • Highlights: Kheerganga is known for its hot springs, offering trekkers a relaxing soak after a day of hiking.
  • Activities: The trek offers a mix of adventure and spirituality. The hot springs at the end of the trek are the highlight, providing an ideal way to relax amid the Himalayas.

10. Malana Village

  • Location and Access: Around 21 km from Manali in the Parvati Valley, Malana is a unique village steeped in ancient customs.
  • Highlights: Malana’s residents consider themselves descendants of Alexander the Great, and their customs and language are distinct from the rest of Himachal.
  • Activities: Visiting Malana offers insight into a completely unique culture. Surrounded by stunning landscapes, the village is both a cultural and scenic delight for visitors.

These amazing and hidden places around Manali are sure to add a memorable twist to your travel experience. Exploring these offbeat locations will give you a new perspective on Himachal Pradesh’s natural beauty and cultural richness.

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गैर-हिमाचली नहीं चला सकेंगे होमस्टे, कानून में छूट के तहत खरीदी जमीन पर https://himachal.live/non-himachalis-cant-run-homestays-on-land-bought-in-relaxation-of-law/ Wed, 23 Oct 2024 01:33:13 +0000 https://himachal.live/?p=321 गैर-हिमाचली, जिन्होंने राज्य में आवासीय उद्देश्य से जमीन खरीदी है, उन्हें अपने घरों में होमस्टे चलाने की अनुमति नहीं होगी, क्योंकि उन्हें कानून में छूट के तहत आत्म-उपयोग के लिए जमीन खरीदने की अनुमति दी गई थी, न कि व्यावसायिक गतिविधि के लिए। गैर-पंजीकृत होमस्टे के संचालन से संबंधित सभी मुद्दों की जांच के लिए […]]]>

गैर-हिमाचली, जिन्होंने राज्य में आवासीय उद्देश्य से जमीन खरीदी है, उन्हें अपने घरों में होमस्टे चलाने की अनुमति नहीं होगी, क्योंकि उन्हें कानून में छूट के तहत आत्म-उपयोग के लिए जमीन खरीदने की अनुमति दी गई थी, न कि व्यावसायिक गतिविधि के लिए।

गैर-पंजीकृत होमस्टे के संचालन से संबंधित सभी मुद्दों की जांच के लिए गठित एक कैबिनेट उप-समिति ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। यह रिपोर्ट कल यहां होने वाली कैबिनेट बैठक में रखी जाने की संभावना है।

सूत्रों के अनुसार, उप-समिति ने सिफारिश की है कि अन्य राज्यों के लोगों, जिन्हें 1971 के भू-राजस्व और भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 के तहत आवासीय उद्देश्य के लिए जमीन खरीदने की छूट दी गई थी, उन्हें अपने घरों में होमस्टे चलाने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, हिमाचलियों, जो किसान नहीं हैं और जिन्होंने धारा 118 के तहत छूट के आधार पर जमीन खरीदी है, को होमस्टे चलाने की अनुमति होगी, उन्होंने कहा।

ऐसे कई घर हैं जो होमस्टे के रूप में चलाए जा रहे हैं। राज्य पर्यटन विभाग के साथ 4,289 होमस्टे पंजीकृत हैं, हालांकि वास्तविक संख्या इससे काफी अधिक हो सकती है। उप-समिति की एक और महत्वपूर्ण सिफारिश यह है कि सभी होमस्टे जो नगर निगम सीमा और योजना क्षेत्रों के भीतर स्थित हैं, उनसे जल और बिजली आपूर्ति के लिए वाणिज्यिक दरें वसूली जाएंगी। वर्तमान में, सभी होमस्टे से घरेलू दरों पर शुल्क लिया जा रहा है, और परिणामस्वरूप, सरकार राजस्व खो रही है, जबकि इनमें से कुछ इकाइयां अच्छा मुनाफा कमा रही हैं।

हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सभी होमस्टे से जल और बिजली के लिए घरेलू दरें ली जाती रहेंगी। इसका उद्देश्य पर्यटन का लाभ ग्रामीण और आंतरिक क्षेत्रों तक पहुंचाना और आवश्यक रोजगार के अवसर पैदा करना है। सूत्रों के अनुसार, उप-समिति की सिफारिशों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में सभी होमस्टे को वस्तु एवं सेवा कर (GST) नंबर लेना होगा, इसके अलावा पर्यटन विभाग में अनिवार्य पंजीकरण भी कराना होगा।

यह पाया गया है कि राज्य में कई गैर-पंजीकृत होमस्टे अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। उप-समिति ने यह भी सिफारिश की है कि होमस्टे से ली जाने वाली नाममात्र पंजीकरण शुल्क को बढ़ाया जाना चाहिए।

सरकार ने होमस्टे के मुद्दों की जांच के लिए उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान की अध्यक्षता में एक कैबिनेट उप-समिति का गठन किया था, जिसमें बार-बार होटलों के मालिकों की यह अपील थी कि राज्य में होमस्टे की बढ़ती संख्या के कारण उनके व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि होमस्टे सरकार को कोई कर नहीं देते हैं।

कैबिनेट उप-समिति ने हितधारकों के साथ कई बैठकों का आयोजन किया और मुद्दे की व्यावहारिक समझ हासिल करने के लिए होटल मालिकों और होमस्टे मालिकों से प्रतिक्रिया ली। इसके अलावा, सरकार चाहती है कि होमस्टे के मालिकों से कम से कम कुछ कर वसूला जाए, क्योंकि कोविड के बाद ये यात्रियों के बीच बहुत लोकप्रिय हो गए हैं।

जल, बिजली के लिए वाणिज्यिक दरें

उप-समिति की रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि हिमाचलियों, जिन्होंने धारा 118 के तहत छूट के साथ जमीन खरीदी है, को होमस्टे चलाने की अनुमति दी जाए नगर निगम सीमा और योजना क्षेत्रों में स्थित सभी होमस्टे से जल और बिजली आपूर्ति के लिए वाणिज्यिक दरें ली जाएं हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित सभी होमस्टे से जल और बिजली के लिए घरेलू दरें ली जाती रहेंगी उप-समिति ने यह भी सिफारिश की है कि होमस्टे से ली जाने वाली पंजीकरण शुल्क को बढ़ाया जाए

 

Click here to read: Compendium of Rules, Instructions and Clarifications relating to Section 118 of the H.P. Tenancy & Land Reforms Act, 1972.

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सिरमौर: हिमाचल प्रदेश का प्राकृतिक और सांस्कृतिक रत्न https://himachal.live/sirmaur-the-gem-of-himachal-pradeshs-nature-and-culture/ Fri, 18 Oct 2024 17:45:50 +0000 https://himachal.live/?p=298 सिरमौर: हिमाचल प्रदेश का प्राकृतिक और सांस्कृतिक रत्न सिरमौर (Sirmaur) जिला, हिमाचल प्रदेश का एक ऐतिहासिक और प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण क्षेत्र है। यह जिला अपनी हरी-भरी वादियों, पहाड़ी मंदिरों, रोमांचक पर्यटन स्थलों और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। सिरमौर की समृद्ध विरासत, सुंदर प्राकृतिक दृश्य, और धार्मिक स्थलों ने इसे हिमाचल प्रदेश का […]]]>

सिरमौर: हिमाचल प्रदेश का प्राकृतिक और सांस्कृतिक रत्न

सिरमौर (Sirmaur) जिला, हिमाचल प्रदेश का एक ऐतिहासिक और प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण क्षेत्र है। यह जिला अपनी हरी-भरी वादियों, पहाड़ी मंदिरों, रोमांचक पर्यटन स्थलों और सांस्कृतिक धरोहर के लिए प्रसिद्ध है। सिरमौर की समृद्ध विरासत, सुंदर प्राकृतिक दृश्य, और धार्मिक स्थलों ने इसे हिमाचल प्रदेश का एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बना दिया है। चलिए इस अद्भुत जिले की खासियतों और इसके प्रमुख आकर्षणों पर एक नज़र डालते हैं।

सिरमौर का इतिहास और सांस्कृतिक विरासत

सिरमौर का इतिहास बेहद पुराना है और इसे प्राचीन काल में “सिरमौरी” के नाम से जाना जाता था। इस जिले का नाम सिरमौर इसलिए पड़ा क्योंकि यहां के शासक अपने समय में पूरे क्षेत्र के ‘सिरमौर’ (नेता) माने जाते थे। सिरमौर में कई ऐतिहासिक किले, मंदिर और धरोहर स्थल हैं, जो इसकी प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।

सिरमौर के प्रमुख पर्यटन स्थल

  1. नाहन (Nahan): सिरमौर जिले का मुख्यालय नाहन, समुद्र तल से 932 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक सुंदर पहाड़ी शहर है। नाहन अपनी साफ-सुथरी सड़कों, हरे-भरे बाग-बगीचों और अद्वितीय मंदिरों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की शांत वादियाँ और सुखद मौसम इसे पर्यटकों के लिए एक आकर्षक स्थान बनाते हैं।
  2. रेणुका झील (Renuka Lake): रेणुका झील हिमाचल प्रदेश की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील है। यह झील देवी रेणुका के नाम पर है, और इसे धार्मिक और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। झील के चारों ओर घना जंगल और पहाड़ियों का मनोरम दृश्य इसे एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बनाता है। यहां हर साल नवंबर में रेणुका मेले का आयोजन होता है, जो एक प्रमुख आकर्षण है।
  3. पावंटा साहिब (Paonta Sahib): यह गुरुद्वारा सिख धर्म के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी से जुड़ा एक ऐतिहासिक स्थल है। यहाँ सिखों के लिए धार्मिक महत्त्व के साथ-साथ, पर्यटकों के लिए भी यह स्थल आकर्षण का केंद्र है। पावंटा साहिब का शांत वातावरण और यमुना नदी के तट पर स्थित यह गुरुद्वारा एक आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।
  4. चूड़धार पर्वत (Churdhar Peak): सिरमौर का सबसे ऊंचा पर्वत चूड़धार, ट्रेकिंग और एडवेंचर प्रेमियों के लिए स्वर्ग के समान है। चूड़धार चोटी समुद्र तल से लगभग 3,647 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है और यहां से हिमालय की भव्य चोटियों का अद्भुत नजारा देखा जा सकता है। चूड़धार ट्रेक एक धार्मिक स्थल भी है, क्योंकि यहां भगवान शिव का एक प्रसिद्ध मंदिर स्थित है।
  5. हाब्बन घाटी (Habban Valley): सिरमौर की इस खूबसूरत घाटी को “मिनी कश्मीर” भी कहा जाता है। यहाँ के जंगलों में देवदार, चीड़ और अन्य हरे-भरे पेड़ हैं, जो प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाते हैं। यह घाटी ट्रेकिंग, कैंपिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहतरीन जगह है।

सिरमौर की विशेषताएँ

  1. बागवानी और कृषि: सिरमौर जिला सेब, आलूबुखारा, आड़ू, किन्नू, और नींबू उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था लोगों की आजीविका का मुख्य स्रोत है। सिरमौर की बागवानी उत्पाद हिमाचल प्रदेश के कृषि बाजार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  2. खानपान: सिरमौर में हिमाचली व्यंजन का अद्वितीय स्वाद मिलता है। यहाँ के स्थानीय व्यंजन जैसे धाम, सिड्डू, पातरोडू और बबरू प्रसिद्ध हैं, जो पर्यटकों को सिरमौर की खासियतों से रूबरू कराते हैं।
  3. त्यौहार और मेले: सिरमौर के लोग अपने पारंपरिक त्यौहारों और मेलों के लिए प्रसिद्ध हैं। रेणुका मेला, बिसु मेला, और सिरमौर के अन्य क्षेत्रीय उत्सव लोगों के सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यहाँ के मेलों में स्थानीय कला, शिल्प और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

रोमांचक गतिविधियाँ

  1. ट्रेकिंग और कैंपिंग: सिरमौर में कई बेहतरीन ट्रेकिंग मार्ग हैं, जिनमें चूड़धार ट्रेक सबसे लोकप्रिय है। ट्रेकिंग प्रेमी सिरमौर की प्राकृतिक सुंदरता का अनुभव करते हुए जंगलों और पहाड़ियों की सैर कर सकते हैं। यहाँ कैंपिंग के लिए भी कई बेहतरीन स्थान हैं, जहाँ आप प्रकृति के बीच रात गुजार सकते हैं।
  2. रिवर राफ्टिंग: पावंटा साहिब के पास यमुना नदी पर रिवर राफ्टिंग की सुविधा भी उपलब्ध है, जो रोमांच प्रेमियों को एक अनूठा अनुभव प्रदान करती है।

कैसे पहुंचे सिरमौर

  • सड़क मार्ग: सिरमौर अच्छी तरह से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। दिल्ली, चंडीगढ़ और शिमला से बस और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध हैं, जो आपको सिरमौर के प्रमुख स्थानों तक ले जाएंगी।
  • रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन कालका है, जो नाहन से लगभग 110 किलोमीटर दूर है। यहाँ से टैक्सी या बस द्वारा सिरमौर पहुँचा जा सकता है।
  • वायु मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा चंडीगढ़ हवाई अड्डा है, जो सिरमौर से लगभग 85 किलोमीटर दूर है।

सिरमौर आने का सबसे अच्छा समय

सिरमौर में घूमने का सबसे अच्छा समय मार्च से जून और सितंबर से नवंबर के बीच होता है। इस दौरान मौसम सुहावना होता है और आप यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता का भरपूर आनंद ले सकते हैं। सर्दियों में यहाँ का तापमान काफी गिर जाता है और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी भी होती है, जो सिरमौर की सुंदरता को और निखार देती है।

निष्कर्ष

सिरमौर जिला हिमाचल प्रदेश का एक अनमोल रत्न है, जहाँ प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहर और धार्मिक स्थलों का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यहाँ आने वाले पर्यटक न केवल प्रकृति के करीब रहते हैं, बल्कि हिमाचली संस्कृति और यहाँ की विरासत से भी रूबरू होते हैं। यदि आप अपनी यात्रा में शांति, रोमांच और सांस्कृतिक धरोहर का अनुभव करना चाहते हैं, तो सिरमौर ज़रूर आएं।

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डोभी, मनाली: साहसिक पैराग्लाइडिंग का नया हॉटस्पॉट https://himachal.live/dobhi-near-manali-a-new-hotspot-for-thrilling-paragliding/ Fri, 18 Oct 2024 07:06:53 +0000 https://himachal.live/?p=293 डोभी, मनाली: साहसिक पैराग्लाइडिंग का नया हॉटस्पॉट हिमाचल प्रदेश में रोमांचक खेलों की बात करें तो पैराग्लाइडिंग का नाम सबसे ऊपर आता है। जब भी लोग हिमाचल में पैराग्लाइडिंग का अनुभव लेना चाहते हैं, तो आमतौर पर बीर-बिलिंग और सोलांग घाटी की चर्चा होती है। लेकिन हाल ही में डोभी, जो मनाली के पास स्थित […]]]>

डोभी, मनाली: साहसिक पैराग्लाइडिंग का नया हॉटस्पॉट

हिमाचल प्रदेश में रोमांचक खेलों की बात करें तो पैराग्लाइडिंग का नाम सबसे ऊपर आता है। जब भी लोग हिमाचल में पैराग्लाइडिंग का अनुभव लेना चाहते हैं, तो आमतौर पर बीर-बिलिंग और सोलांग घाटी की चर्चा होती है। लेकिन हाल ही में डोभी, जो मनाली के पास स्थित है, पैराग्लाइडिंग के एक नए और आकर्षक गंतव्य के रूप में उभर रहा है।
डोभी की शानदार प्राकृतिक सुंदरता और यहाँ की ऊँचाई इसे एक आदर्श पैराग्लाइडिंग स्थल बनाती है, जो रोमांच के साथ-साथ शांति का अनुभव भी कराती है।

डोभी: कहाँ स्थित है?

डोभी, कुल्लू जिले में, मनाली से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक छोटा सा गाँव है। यह स्थान कुल्लू और मनाली के बीच पड़ता है और ब्यास नदी के किनारे बसा हुआ है। हालाँकि, यह जगह पहले इतनी प्रसिद्ध नहीं थी, लेकिन हाल के वर्षों में यहाँ पैराग्लाइडिंग की बढ़ती लोकप्रियता ने इसे साहसिक प्रेमियों के बीच खास बना दिया है।

डोभी में पैराग्लाइडिंग: क्यों है खास?

  1. ऊँचाई और स्थलाकृति
    डोभी में पैराग्लाइडिंग की टेक-ऑफ साइट लगभग 8000 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। इस ऊँचाई से उड़ान भरने का अनुभव बिल्कुल अलग होता है। हरे-भरे पहाड़ों और घाटियों का नज़ारा आँखों के सामने होते हुए खुले आसमान में उड़ान भरना बेहद रोमांचक होता है। ब्यास नदी के किनारे की लैंडिंग साइट भी पैराग्लाइडिंग को और मजेदार बनाती है।
  2. भीड़भाड़ से दूर
    जहाँ बीर-बिलिंग और सोलांग घाटी में पैराग्लाइडिंग के लिए भारी भीड़ होती है, वहीं डोभी अपेक्षाकृत शांत और कम भीड़भाड़ वाला स्थान है। यह इसे उन लोगों के लिए एक आदर्श जगह बनाता है, जो रोमांच के साथ-साथ शांत वातावरण में पैराग्लाइडिंग का मजा लेना चाहते हैं।
  3. बेहतरीन मौसम और दृश्यता
    डोभी में सालभर अच्छा मौसम रहता है, जिससे यहाँ पैराग्लाइडिंग के लिए उचित मौसम की प्रतीक्षा कम करनी पड़ती है। विशेष रूप से अक्टूबर से जून तक का समय पैराग्लाइडिंग के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान आसमान साफ होता है और दृश्यता बेहद अच्छी होती है, जिससे ऊँचाई से आसपास के बर्फ से ढके पहाड़ और हरी-भरी घाटियों का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है।
  4. शुरुआती और अनुभवी दोनों के लिए आदर्श
    डोभी में पैराग्लाइडिंग न केवल अनुभवी पैराग्लाइडर्स के लिए, बल्कि शुरुआती लोगों के लिए भी एक शानदार अनुभव है। यहाँ के प्रशिक्षक अत्यधिक अनुभवी होते हैं और शुरुआती लोगों को पूरा मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। आप टैंडेम फ्लाइट्स का भी अनुभव ले सकते हैं, जिसमें एक प्रशिक्षित पायलट आपके साथ उड़ान भरता है।

पैराग्लाइडिंग के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें

  • सुरक्षा उपकरण: हेलमेट, हार्नेस, और अन्य सुरक्षा उपकरणों का सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए। प्रशिक्षकों की हर बात को ध्यान से सुने और उनका पालन करें।
  • स्वास्थ्य और फिटनेस: पैराग्लाइडिंग से पहले यह सुनिश्चित करें कि आप शारीरिक रूप से फिट हैं। हृदय रोग या गंभीर फोबिया से पीड़ित लोगों को पैराग्लाइडिंग से बचना चाहिए।
  • मौसम की जानकारी: हमेशा मौसम की स्थिति को चेक करें, क्योंकि खराब मौसम में उड़ान भरने से जोखिम बढ़ सकता है।
  • पर्यावरण का ध्यान: हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है, इसलिए कचरा न फैलाएँ और पर्यावरण का संरक्षण करें।

कैसे पहुँचें डोभी?

  • निकटतम हवाई अड्डा: भुंतर हवाई अड्डा (कुल्लू), जो डोभी से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर है।
  • सड़क मार्ग: डोभी तक पहुँचने के लिए मनाली या कुल्लू से कैब या बस की सुविधा ली जा सकती है।
  • रेल मार्ग: सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन जोगिंदर नगर है, जो लगभग 125 किलोमीटर दूर है।

डोभी में अन्य गतिविधियाँ

डोभी सिर्फ पैराग्लाइडिंग के लिए ही नहीं, बल्कि यहाँ के आसपास कई अन्य रोमांचक गतिविधियाँ भी की जा सकती हैं। यहाँ के शांत वातावरण में ट्रेकिंग और कैम्पिंग भी लोकप्रिय हैं। इसके अलावा, ब्यास नदी के किनारे आप रिवर राफ्टिंग का भी लुत्फ उठा सकते हैं।

निष्कर्ष

डोभी हिमाचल प्रदेश के उन छिपे हुए रत्नों में से एक है, जो साहसिक खेल प्रेमियों के लिए एक नया अनुभव लेकर आया है। यहाँ की पैराग्लाइडिंग आपको रोमांचक ऊँचाई से उड़ने का मौका देती है, जहाँ से आप हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता को बिल्कुल अलग दृष्टिकोण से देख सकते हैं। यदि आप भीड़भाड़ से दूर रहकर शांतिपूर्ण और रोमांचक पैराग्लाइडिंग अनुभव लेना चाहते हैं, तो डोभी आपकी बकेट लिस्ट में जरूर होना चाहिए।


यह लेख हिमाचल प्रदेश के डोभी क्षेत्र में पैराग्लाइडिंग के रोमांच को दर्शाता है। Himachal Live पर यह लेख उन लोगों को आकर्षित करेगा, जो हिमाचल के अनछुए और रोमांचक स्थानों के बारे में जानने के इच्छुक हैं।

 

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हिमाचल प्रदेश में पैराग्लाइडिंग: साहसिक खेलों का स्वर्ग https://himachal.live/paragliding-in-himachal-pradesh-a-heaven-for-adventure-lovers/ Fri, 18 Oct 2024 06:59:29 +0000 https://himachal.live/?p=287 हिमाचल प्रदेश में पैराग्लाइडिंग: साहसिक खेलों का स्वर्ग हिमाचल प्रदेश, अपनी बर्फ से ढकी चोटियों और हरी-भरी घाटियों के अलावा, साहसिक खेलों का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और ऊँचाईयां इसे एडवेंचर प्रेमियों के लिए एक आदर्श गंतव्य बनाती हैं। अगर आप रोमांचक अनुभव की तलाश में हैं, तो हिमाचल […]]]>

हिमाचल प्रदेश में पैराग्लाइडिंग: साहसिक खेलों का स्वर्ग

हिमाचल प्रदेश, अपनी बर्फ से ढकी चोटियों और हरी-भरी घाटियों के अलावा, साहसिक खेलों का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता और ऊँचाईयां इसे एडवेंचर प्रेमियों के लिए एक आदर्श गंतव्य बनाती हैं। अगर आप रोमांचक अनुभव की तलाश में हैं, तो हिमाचल प्रदेश की पैराग्लाइडिंग आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। खुले आसमान में उड़ते हुए हिमाचल के हरे-भरे पहाड़ों और घाटियों का नजारा किसी सपने जैसा होता है।

हिमाचल प्रदेश में पैराग्लाइडिंग के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान

  1. बीर-बिलिंग
    हिमाचल प्रदेश में पैराग्लाइडिंग के लिए सबसे प्रसिद्ध स्थान है बीर-बिलिंग। यह जगह न केवल भारत, बल्कि विश्वभर में पैराग्लाइडिंग के शौकीनों के लिए एक पसंदीदा स्थल है। बिलिंग टेक-ऑफ के लिए जाना जाता है, जबकि बीर लैंडिंग साइट है। यहाँ का टेक-ऑफ पॉइंट समुद्र तल से लगभग 2400 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जो इसे ऊँचाई से पैराग्लाइडिंग के लिए आदर्श बनाता है। 2015 में यहाँ पैराग्लाइडिंग वर्ल्ड कप का आयोजन किया गया था, जो इस स्थान की लोकप्रियता को और बढ़ाता है।
  2. मनाली
    मनाली एक और प्रमुख स्थान है जहाँ पैराग्लाइडिंग की जा सकती है। यहाँ सोलांग घाटी और फातू सर्दियों में स्नोफॉल और गर्मियों में पैराग्लाइडिंग के लिए प्रसिद्ध हैं। मनाली की खूबसूरत घाटियों के ऊपर उड़ने का अनुभव अद्वितीय होता है। यहाँ पैराग्लाइडिंग की उड़ान के दौरान ब्यास नदी, हरे-भरे जंगल और हिमालय की पहाड़ियाँ आपके सामने होती हैं।
  3. धर्मशाला
    धर्मशाला भी पैराग्लाइडिंग के लिए एक बेहतरीन जगह है। यहाँ के मैक्लोडगंज क्षेत्र में पर्यटक पैराग्लाइडिंग का लुत्फ उठा सकते हैं। पहाड़ियों और कांगड़ा घाटी के सुंदर नजारों के साथ, धर्मशाला एक शानदार गंतव्य है, जहाँ आप हवा में उड़ने का आनंद ले सकते हैं।
  4. कुल्लू
    कुल्लू घाटी भी पैराग्लाइडिंग के लिए एक उत्कृष्ट जगह है। कुल्लू की वादियों में पैराग्लाइडिंग करना रोमांच और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्वितीय मेल है। यहाँ के टेक-ऑफ पॉइंट की ऊँचाई और घाटी के चारों ओर की हरियाली इसे साहसिक खेल प्रेमियों के बीच लोकप्रिय बनाती है।

पैराग्लाइडिंग का सबसे अच्छा मौसम

हिमाचल प्रदेश में पैराग्लाइडिंग के लिए सबसे अच्छा मौसम अक्टूबर से जून तक होता है।

  • अक्टूबर से नवंबर के महीनों में मौसम साफ होता है, और ठंडी हवा के साथ उड़ान भरने का आनंद मिलता है।
  • मार्च से जून तक भी पैराग्लाइडिंग के लिए अच्छा समय माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मौसम हल्का गर्म रहता है और दृश्यता बहुत अच्छी होती है।

मानसून के समय (जुलाई से सितंबर) में यहाँ पैराग्लाइडिंग कम होती है, क्योंकि भारी बारिश और बादल छाए रहने के कारण उड़ानें बाधित हो सकती हैं और सुरक्षा का खतरा होता है।

पैराग्लाइडिंग से पहले जानने योग्य बातें

  1. स्वास्थ्य और फिटनेस
    पैराग्लाइडिंग एक साहसिक खेल है, इसलिए यह जरूरी है कि आपका स्वास्थ्य अच्छा हो। हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, या गंभीर फोबिया से पीड़ित व्यक्तियों को पैराग्लाइडिंग से बचना चाहिए। यदि आपको कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।
  2. सुरक्षा गियर
    सुनिश्चित करें कि आप सही सुरक्षा गियर पहन रहे हैं। हेलमेट, हार्नेस, और सुरक्षा बेल्ट अच्छी तरह से फिट होनी चाहिए। प्रशिक्षक की सभी हिदायतों को ध्यान से सुनें और उनका पालन करें।
  3. प्रशिक्षक का अनुभव
    यदि आप पहली बार पैराग्लाइडिंग कर रहे हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि आपका प्रशिक्षक अनुभवी और प्रमाणित हो। प्रशिक्षक आपको टेक-ऑफ, उड़ान और लैंडिंग के दौरान निर्देशित करेगा, इसलिए उनकी सलाह मानें।
  4. पर्यावरण का ध्यान
    हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता को बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। पैराग्लाइडिंग के दौरान कचरा फैलाने से बचें और पर्यावरण का संरक्षण करें।
  5. आवश्यक परमिट
    हिमाचल प्रदेश में पैराग्लाइडिंग के लिए कुछ स्थानों पर अनुमति की आवश्यकता हो सकती है, इसलिए सुनिश्चित करें कि आप संबंधित अधिकारियों से पहले से अनुमति प्राप्त कर लें।

पैराग्लाइडिंग के रोमांच का आनंद लें

पैराग्लाइडिंग हिमाचल प्रदेश में एक अद्वितीय अनुभव है। यहाँ की खुली और हरी-भरी घाटियों के ऊपर उड़ना न केवल रोमांचकारी होता है, बल्कि यह हिमाचल के प्राकृतिक सौंदर्य को एक अलग नजरिए से देखने का मौका भी देता है। हिमाचल Live के माध्यम से हम आपको हिमाचल प्रदेश की साहसिक गतिविधियों से परिचित कराना चाहते हैं, ताकि आप इस अद्भुत अनुभव का हिस्सा बन सकें।


यह लेख हिमाचल प्रदेश में पैराग्लाइडिंग के अनुभव को कवर करता है और हिमाचल Live के लिए आपके पाठकों को रोमांचित करने के लिए एक बेहतरीन विषय है।

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हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक वास्तुकला: काठ-कूनी शैली की अनूठी खूबसूरती https://himachal.live/traditional-architecture-of-himachal-pradesh-the-unique-beauty-of-kath-kuni-style/ Fri, 18 Oct 2024 02:57:57 +0000 https://himachal.live/?p=277 हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक वास्तुकला: काठ-कूनी शैली की अनूठी खूबसूरती हिमाचल प्रदेश सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर के लिए नहीं, बल्कि अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। पहाड़ी इलाकों में रहने के लिए विकसित की गई पारंपरिक निर्माण शैली हिमाचल के हर गाँव और कस्बे में देखने को मिलती है। […]]]>

हिमाचल प्रदेश के पारंपरिक वास्तुकला: काठ-कूनी शैली की अनूठी खूबसूरती

हिमाचल प्रदेश सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक धरोहर के लिए नहीं, बल्कि अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। पहाड़ी इलाकों में रहने के लिए विकसित की गई पारंपरिक निर्माण शैली हिमाचल के हर गाँव और कस्बे में देखने को मिलती है। इनमें सबसे प्रसिद्ध है काठ-कूनी शैली, जो हिमाचल की सदियों पुरानी परंपरा और संस्कृति को दर्शाती है। यह शैली न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि भूकंपरोधी भी मानी जाती है।

काठ-कूनी शैली: क्या है इसकी खासियत?

काठ-कूनी वास्तुकला हिमाचल के पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली एक अनोखी निर्माण शैली है। इस शैली में लकड़ी (काठ) और पत्थरों (कूनी) का विशेष संयोजन किया जाता है, जिससे भवन न केवल सुंदर दिखते हैं, बल्कि अत्यधिक ठंड और भूकंप जैसे प्राकृतिक आपदाओं से भी सुरक्षा प्रदान करते हैं। लकड़ी और पत्थर की यह जुगलबंदी घरों को मजबूत और टिकाऊ बनाती है, और यह हिमाचल के मौसम के अनुरूप एकदम सही मानी जाती है।

भूकंपरोधी संरचना

हिमाचल प्रदेश भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र में आता है, लेकिन काठ-कूनी शैली की वास्तुकला ने इस चुनौती का समाधान बेहद परंपरागत तरीके से किया है। काठ-कूनी घरों की संरचना में लकड़ी और पत्थर का संतुलित उपयोग किया जाता है, जिससे ये घर भूकंप के झटकों को सहने में सक्षम होते हैं। लकड़ी लचीली होती है, जो भूकंप के दौरान इमारत की स्थिरता बनाए रखने में मदद करती है, और पत्थर का वजन इसे मजबूत आधार देता है।

पर्यावरण के अनुकूल निर्माण

काठ-कूनी शैली पूरी तरह से प्राकृतिक सामग्रियों पर आधारित है। इसमें प्रयोग की जाने वाली लकड़ी और पत्थर स्थानीय रूप से उपलब्ध होते हैं, जिससे परिवहन की लागत और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जाता है। इसके अलावा, लकड़ी की संरचना ठंड के मौसम में घर को गर्म रखती है और गर्मियों में ठंडक प्रदान करती है, जिससे ऊर्जा की खपत कम होती है।

हिमाचल की पारंपरिक घरों का सौंदर्य

काठ-कूनी शैली के घर न केवल मजबूत होते हैं, बल्कि इनमें एक अद्वितीय सुंदरता भी होती है। लकड़ी की नक्काशी और पत्थरों की बारीक सजावट हिमाचली लोक कला और संस्कृति को दर्शाती है। कई घरों के दरवाजों और खिड़कियों पर पारंपरिक डिज़ाइन और मूर्तिकला की गई होती है, जो इन घरों को एक अलग पहचान देती है। कई प्राचीन मंदिर भी इसी शैली में बने हुए हैं, जो आज भी लोगों के आस्था और संस्कृति का केंद्र बने हुए हैं।

काठ-कूनी शैली के आधुनिक उपयोग

हालाँकि आधुनिक निर्माण तकनीकों और सामग्रियों के आने से पारंपरिक काठ-कूनी शैली का उपयोग कम हो गया था, लेकिन हाल के वर्षों में लोगों ने इस शैली को फिर से अपनाना शुरू कर दिया है। आज के आर्किटेक्ट और डिजाइनर काठ-कूनी शैली को आधुनिक डिज़ाइनों में मिलाकर एक नया रूप दे रहे हैं। पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता और पारंपरिक निर्माण तकनीकों की ओर लौटने की इच्छा ने इस शैली को फिर से प्रासंगिक बना दिया है।

संरक्षण की आवश्यकता

काठ-कूनी शैली की इमारतें हिमाचल की सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन समय के साथ इनमें से कई घर और भवन उपेक्षा का शिकार हो गए हैं। सरकार और स्थानीय संगठन अब इस पारंपरिक वास्तुकला के संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। कई गाँवों में इन घरों को संरक्षित करने और नए निर्माणों में इस शैली को फिर से शामिल करने के लिए विशेष पहल की जा रही है, ताकि हिमाचल की यह अमूल्य धरोहर सुरक्षित रह सके।

निष्कर्ष

हिमाचल प्रदेश की काठ-कूनी वास्तुकला एक ऐसी अनमोल धरोहर है, जो न केवल इस राज्य की पारंपरिक जीवनशैली को दर्शाती है, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन का भी प्रतीक है। आधुनिकता की दौड़ में, यह जरूरी है कि हम अपनी पुरानी परंपराओं और वास्तुकला को सहेजकर रखें। Himachal Live के माध्यम से, हम हिमाचल की इस अद्वितीय निर्माण शैली को दुनिया के सामने लाना चाहते हैं, ताकि लोग हिमाचल की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ इसकी सांस्कृतिक धरोहर का भी आनंद उठा सकें।


यह लेख हिमाचल प्रदेश की पारंपरिक वास्तुकला पर केंद्रित है और आपकी वेबसाइट Himachal Live के पाठकों के लिए एक दिलचस्प और सूचनात्मक विषय हो सकता है।

 

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हिमाचल प्रदेश के ‘मिस्ट्री लेक’ रूपकुंड की रहस्यमयी कहानी https://himachal.live/the-mysterious-roopkund-lake-a-tale-of-skeletons-and-secrets/ Fri, 18 Oct 2024 02:49:54 +0000 https://himachal.live/?p=270 हिमाचल प्रदेश के ‘मिस्ट्री लेक’ रूपकुंड की रहस्यमयी कहानी हिमाचल प्रदेश, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां कई ऐसे रहस्य भी छिपे हुए हैं जो पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। ऐसा ही एक अनोखा और रोमांचक स्थान है उत्तराखंड की सीमा के […]]]>

हिमाचल प्रदेश के ‘मिस्ट्री लेक’ रूपकुंड की रहस्यमयी कहानी

हिमाचल प्रदेश, अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां कई ऐसे रहस्य भी छिपे हुए हैं जो पर्यटकों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। ऐसा ही एक अनोखा और रोमांचक स्थान है उत्तराखंड की सीमा के पास स्थित रूपकुंड झील, जिसे ‘मिस्ट्री लेक’ के नाम से भी जाना जाता है। हालाँकि यह झील उत्तराखंड में स्थित है, लेकिन हिमाचल और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों के लोग इसके इतिहास और कहानी से जुड़े हुए हैं। यह झील सदियों से एक अनसुलझी पहेली बनी हुई है, और यहाँ मिलने वाली प्राचीन मानव कंकालों की कहानियों ने इसे और भी रहस्यमयी बना दिया है।

रूपकुंड झील: एक अनोखी पहेली

समुद्र तल से लगभग 16,500 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह झील अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ यहाँ पाई जाने वाली प्राचीन मानव हड्डियों के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। इस झील का पानी अधिकांश समय बर्फ से ढका रहता है, लेकिन जब बर्फ पिघलती है, तो झील के किनारे और उसके अंदर मानव कंकाल दिखाई देते हैं। यह दृश्य जितना अद्भुत है, उतना ही रहस्यमय भी।

कंकालों की खोज

सबसे पहले 1942 में ब्रिटिश जंगल अधिकारियों द्वारा रूपकुंड झील में इन कंकालों की खोज की गई थी। पहले यह माना गया कि ये कंकाल किसी युद्ध या महामारी का परिणाम हो सकते हैं, लेकिन समय के साथ इन कंकालों पर शोध करने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि ये हड्डियाँ 9वीं शताब्दी की हैं। इन कंकालों के पास मिले सामान, जैसे लकड़ी के सामान, चमड़े के जूते और गहनों से यह पता चला कि ये लोग किसी बड़े समूह का हिस्सा थे, जो इस क्षेत्र से गुजर रहे थे।

रहस्यमय मौत की वजह

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन लोगों की मौत कैसे हुई? कई वर्षों तक इस पर तरह-तरह के अनुमान लगाए गए। कुछ ने इसे किसी महामारी का परिणाम माना, जबकि अन्य ने सोचा कि ये कंकाल किसी युद्ध में मारे गए सैनिकों के हो सकते हैं। लेकिन 2004 में की गई डीएनए रिसर्च और फोरेंसिक विश्लेषण से यह खुलासा हुआ कि इनकी मौत एक अद्वितीय प्राकृतिक आपदा से हुई थी—शायद एक बड़े ओले के तूफान से। वैज्ञानिकों ने पाया कि सभी कंकालों की खोपड़ियों पर गहरी चोट के निशान थे, जो इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इनकी मृत्यु भारी ओले गिरने से हुई होगी।

स्थानीय मान्यताएँ और लोककथाएँ

रूपकुंड झील के रहस्य से जुड़े कई स्थानीय लोककथाएँ भी हैं। एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, यह समूह राजा जसधवल का था, जो अपनी गर्भवती पत्नी के साथ नंदा देवी की तीर्थयात्रा पर जा रहे थे। कहा जाता है कि उन्होंने रास्ते में अनुचित व्यवहार किया, जिससे देवी नंदा नाराज हो गईं और इस समूह पर कहर बरपा दिया। इसे देवी का श्राप माना जाता है, जिसके कारण यह पूरा समूह झील के पास मारा गया।

रूपकुंड झील की यात्रा

रूपकुंड झील तक पहुँचने का रास्ता बेहद रोमांचक और चुनौतीपूर्ण है। यह जगह केवल ट्रेकिंग के माध्यम से ही पहुँची जा सकती है, और यह हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के साहसिक प्रेमियों के बीच एक लोकप्रिय ट्रेकिंग डेस्टिनेशन बन चुका है। यहाँ के रास्ते में बर्फ से ढके पहाड़, हरे-भरे घास के मैदान और ऊँची चोटियाँ यात्रियों के मन को मोह लेते हैं। हालाँकि, झील तक पहुँचने के लिए कठिन चढ़ाई और कठिन मौसम का सामना करना पड़ता है, लेकिन इस अद्भुत और रहस्यमयी जगह की झलक पाने के लिए यह सब रोमांचक अनुभव का हिस्सा है।

निष्कर्ष

रूपकुंड झील केवल एक प्राकृतिक आश्चर्य ही नहीं, बल्कि एक अनसुलझा रहस्य भी है, जो वैज्ञानिकों और इतिहासकारों को वर्षों से आकर्षित करता आ रहा है। हिमाचल प्रदेश के करीब स्थित इस रहस्यमयी झील की कहानी अपने आप में कई रहस्य छिपाए हुए है और इसे देखने के लिए हर साल कई साहसिक पर्यटक यहाँ खिंचे चले आते हैं। हिमाचल Live के माध्यम से हम आपको हिमाचल और उसके आसपास के इन रहस्यमयी और अनोखे स्थानों के बारे में जानकारी देना चाहते हैं, ताकि आप इस अद्भुत दुनिया का हिस्सा बन सकें और इसकी रोमांचक कहानियों का आनंद ले सकें।


यह लेख हिमाचल प्रदेश और उसके आसपास के रोमांचक स्थलों में से एक की रहस्यमयी कहानी पर आधारित है, जो आपके पाठकों को बेहद आकर्षक और रोमांचक लगेगी।

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हिमाचल प्रदेश का सांस्कृतिक खजाना: परंपरा और आधुनिकता का संगम https://himachal.live/himachal-pradesh-a-cultural-treasure-trove-of-tradition-and-modernity/ Fri, 18 Oct 2024 02:39:03 +0000 https://himachal.live/?p=266 हिमाचल प्रदेश का सांस्कृतिक खजाना: परंपरा और आधुनिकता का संगम हिमाचल प्रदेश, जहाँ पहाड़ों की ऊँचाइयाँ आसमान को छूती हैं और नदियाँ शांति से बहती हैं, अपने आप में एक अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर को समेटे हुए है। यह राज्य केवल अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि यहाँ की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के […]]]>

हिमाचल प्रदेश का सांस्कृतिक खजाना: परंपरा और आधुनिकता का संगम

हिमाचल प्रदेश, जहाँ पहाड़ों की ऊँचाइयाँ आसमान को छूती हैं और नदियाँ शांति से बहती हैं, अपने आप में एक अद्वितीय सांस्कृतिक धरोहर को समेटे हुए है। यह राज्य केवल अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि यहाँ की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के लिए भी जाना जाता है। हिमाचल की संस्कृति, यहाँ के पर्व-त्योहारों, लोक कलाओं, खान-पान और पहनावे में गहराई से जमी हुई है।

हिमाचल के लोक उत्सव

हिमाचल के पर्व और उत्सव इस राज्य की आत्मा हैं। चाहे कुल्लू का दशहरा हो, जहाँ पूरे देश से लोग भगवान रघुनाथ जी की शोभायात्रा में भाग लेते हैं, या मिंजर मेला, जो चंबा में फसल कटाई के बाद मनाया जाता है—ये त्यौहार न केवल धर्म और परंपरा से जुड़े होते हैं, बल्कि समाज को एकजुट करते हैं। हर त्यौहार में हिमाचली संस्कृति की झलक मिलती है, चाहे वह पारंपरिक वेशभूषा हो या स्थानीय लोकगीत और नृत्य।

लोक नृत्य और संगीत

हिमाचल की संस्कृति में नाटी नृत्य प्रमुख है, जिसे विशेष मौकों और उत्सवों में किया जाता है। यह नृत्य न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि एक सामाजिक गतिविधि भी है, जो सामूहिकता और एकता का संदेश देती है। हिमाचल के लोक संगीत में ड्रम, ढोल, करनाल और रणसिंघा जैसे वाद्ययंत्रों का इस्तेमाल होता है, जो यहां के पर्वतीय जीवन की कठिनाइयों और खुशियों को प्रतिबिंबित करता है।

पारंपरिक हस्तकला और शिल्प

हिमाचल प्रदेश की हस्तकला और शिल्प दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। यहाँ की कांगड़ा पेंटिंग, जिसमें धार्मिक और प्राकृतिक दृश्य चित्रित किए जाते हैं, कला प्रेमियों के बीच बेहद लोकप्रिय है। इसके अलावा, चंबा की रुमाल कढ़ाई और कुल्लू शॉल अपने बारीक डिज़ाइनों और शानदार गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं। यह कला हिमाचल की सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और इसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी मान्यता दिलाती है।

खान-पान: स्वाद की विविधता

हिमाचल की संस्कृति का एक और महत्वपूर्ण पहलू यहाँ का खान-पान है। हिमाचली व्यंजनों में स्थानीय मसालों और सामग्रियों का उपयोग कर विशेष व्यंजन तैयार किए जाते हैं। धाम, जो विशेष रूप से त्यौहारों और शादियों में परोसी जाती है, हिमाचल का पारंपरिक भोजन है। इसमें चावल, दाल, सब्जियाँ और दही का विशेष संयोजन होता है। इसके अलावा, सिद्दू और मद्रा जैसे व्यंजन हिमाचल की अनूठी पाक परंपराओं का हिस्सा हैं।

आधुनिकता के साथ परंपराओं का संगम

हालांकि, हिमाचल प्रदेश तेजी से आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है, फिर भी यहाँ की पारंपरिक जीवनशैली और सांस्कृतिक विरासत आज भी लोगों के जीवन में गहरी जमी हुई है। हिमाचल के लोग अपनी परंपराओं पर गर्व करते हैं और उन्हें आधुनिकता के साथ संतुलित करने की कला को बखूबी जानते हैं।

निष्कर्ष

हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर न केवल राज्य के लोगों को एकजुट करती है, बल्कि यहाँ आने वाले पर्यटकों को भी आकर्षित करती है। हिमाचल की संस्कृति में बसी सादगी, जीवन के प्रति प्रेम और सामुदायिक भावना हर किसी को प्रेरित करती है। यह राज्य अपने अतीत से जुड़ा रहते हुए, आधुनिकता की ओर भी एक नए भविष्य का निर्माण कर रहा है। Himachal Live के माध्यम से हम इस अद्वितीय सांस्कृतिक खजाने को पूरी दुनिया के सामने लाना चाहते हैं, ताकि हर कोई हिमाचल की इस धरोहर से जुड़ सके और उसकी प्रशंसा कर सके।

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हिमाचल प्रदेश में जापानी फलों की खेती https://himachal.live/himachal-pradesh-and-the-cultivation-of-japanese-fruits/ Wed, 16 Oct 2024 09:37:29 +0000 https://himachal.live/?p=258 हिमाचल प्रदेश, अपनी ठंडी जलवायु और उपजाऊ मिट्टी के कारण, फलों की खेती के लिए एक आदर्श स्थान माना जाता है। यहाँ सेब, खुबानी, नाशपाती और आड़ू जैसे फलों की खेती तो होती ही है, लेकिन हाल के वर्षों में हिमाचल में कुछ विशेष जापानी फलों की खेती भी शुरू हो गई है, जिनकी माँग […]]]>

हिमाचल प्रदेश, अपनी ठंडी जलवायु और उपजाऊ मिट्टी के कारण, फलों की खेती के लिए एक आदर्श स्थान माना जाता है। यहाँ सेब, खुबानी, नाशपाती और आड़ू जैसे फलों की खेती तो होती ही है, लेकिन हाल के वर्षों में हिमाचल में कुछ विशेष जापानी फलों की खेती भी शुरू हो गई है, जिनकी माँग अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ रही है।

जापानी फलों की विशेषता

जापानी फल अपने स्वाद, पोषक तत्वों और उच्च गुणवत्ता के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं। इनमें मुख्य रूप से जापानी सेब (Fuji Apple), जापानी नाशपाती (Nashi Pear), पर्सिमन (Persimmon), और जापानी चेरी (Sakura) शामिल हैं। इन फलों में न केवल स्वाद और ताजगी होती है, बल्कि इनमें विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और अन्य पोषक तत्व भी भरपूर होते हैं, जो सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं।

हिमाचल में जापानी फलों की खेती

हिमाचल प्रदेश ने अपनी पारंपरिक फसल पद्धतियों के साथ-साथ आधुनिक खेती की तकनीकों को अपनाया है, जिससे यहाँ जापानी फलों की खेती सफल हो रही है। जापानी सेब (फूजी सेब) और नाशपाती यहाँ की सबसे प्रमुख जापानी फसलें हैं।

फूजी सेब (Fuji Apple)

फूजी सेब, जिसे जापान में विकसित किया गया था, अब हिमाचल के किसानों द्वारा भी उगाया जा रहा है। इसका स्वाद मीठा और कुरकुरा होता है, और यह दुनियाभर में प्रसिद्ध है। हिमाचल की ठंडी जलवायु फूजी सेब की खेती के लिए एकदम सही है, जिससे यहाँ के किसान अब इसे बड़े पैमाने पर उगा रहे हैं और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भेज रहे हैं।

नाशी नाशपाती (Nashi Pear)

नाशी नाशपाती, जिसे एशियन नाशपाती के नाम से भी जाना जाता है, का आकार गोल और स्वाद रसीला होता है। इसे हिमाचल में “जापानी नाशपाती” के नाम से भी जाना जाता है। यह फल अपने कुरकुरेपन और मीठे स्वाद के लिए पहचाना जाता है। हिमाचल की जलवायु और मिट्टी इस फल के लिए एकदम अनुकूल है, जिससे इसके उत्पादन में काफी बढ़ोतरी हो रही है।

पर्सिमन (Persimmon)

पर्सिमन, जिसे जापान में “काकी” कहा जाता है, हिमाचल में धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा है। इसका स्वाद मीठा होता है और यह पके हुए टमाटर जैसा दिखता है। यह फल विटामिन ए और सी से भरपूर होता है और इसके कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं। हिमाचल की मिट्टी और जलवायु में इस फल की खेती सफल हो रही है।

हिमाचल में जापानी फलों की बढ़ती माँग

जापानी फलों की माँग, खासकर सेब और नाशपाती की, न केवल भारतीय बाजार में, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी तेजी से बढ़ रही है। हिमाचल प्रदेश के किसान अब जापान की तकनीकों और खेती के तरीकों को अपनाकर इन फलों की उच्च गुणवत्ता वाली फसलें उगा रहे हैं, जो उन्हें विदेशी बाजारों में भी बेचने का अवसर प्रदान कर रही हैं।

सरकार की सहायता

हिमाचल प्रदेश सरकार और बागवानी विभाग, किसानों को जापानी फलों की खेती में सहायता प्रदान कर रहे हैं। उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, उच्च गुणवत्ता वाले बीज और पौधों की आपूर्ति, और बाजार में बेचने के लिए उचित समर्थन दिया जा रहा है। इससे किसानों को नई तकनीकों और विदेशी फलों की खेती के प्रति रुचि बढ़ रही है।

निष्कर्ष

जापानी फलों की खेती हिमाचल प्रदेश के कृषि परिदृश्य में एक नई दिशा दे रही है। यहाँ के किसानों को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में नए अवसर मिल रहे हैं और वे अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। हिमाचल में उगाए जा रहे ये फल न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि इनका स्वाद और गुणवत्ता दुनियाभर में हिमाचल प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं।

 

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